वैदिक हस्तरेखाशास्त्र/सामुद्रिकशास्त्र :
हस्तरेखाशास्त्र/सामुद्रिकशास्त्र :
सूर्य पर्वत पर त्रिभुज, नक्षत्र समेत इन 6 निशानों का होना है बेहद खास, देते हैं भविष्य में उन्नति के संकेत !
सूर्य पर्वत पर त्रिभुज, नक्षत्र सहित छह विशेष चिह्न : जन्मकुंडली, प्रश्नकुंडली, नक्षत्र, गोचर और सामुद्रिक शास्त्र के समन्वित नियम !
सूर्य पर्वत का स्थान हथेली में अनामिका यानी रिंग फिंगर के ठीक नीचे और हथेली के ऊपरी भाग में उभरा हुआ स्थान होता है।
इस के उभार और स्थिति को देखकर किसी जातक के जीवन के बारे में जाना जाता है।
साथ ही, इस पर बने चिह्न भी बहुत खास होते हैं।
मान्यता है कि नक्षत्र, त्रिकोण समेत कुछ निशान भविष्य से जुड़े बहुत शुभ संकेत देते हैं।
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Brand: Alpine Willow https://link.amazon/B0hjt4PKO
| { Colour | Walnut with doors |
| Brand | Alpine Willow |
| Theme | Hindu |
| Material | Engineered Wood |
| Style | Walnut Serenique |
| Product Dimensions | 35D x 60W x 145H Centimeters |
| Recommended Uses For Product | Home Temple, Office Temple |
| Finish Type | Glossy |
| Included Components | LED illumination ( In Built), Temple Structure |
| Item Weight | 45 Kilograms } |
{ About this item
- Fully Assembled: Ready to use no need to wait for assembly. Legs and Mukut knocked down for self assembly by customer
- Symbolic Centrepiece: The centrepiece showcases the sacred Om symbol, representing the primordial sound and spiritual enlightenment.
- Cultural Showcase: Adorned with traditional Indian artefacts and accessories, this display serves as a captivating showcase of rich cultural heritage.
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- Versatile Decor: Suitable for both home and office settings, this decorative item can enhance the ambience of any space with its mesmerising aesthetic appeal }
भारतीय ज्योतिष परंपरा में सूर्य को केवल आकाश में दिखाई देने वाला ग्रह नहीं माना गया, बल्कि जीवन में प्रकाश, चेतना, आत्मबल, प्रतिष्ठा, अधिकार, तेज, प्रसिद्धि, पिता, शासन - सत्ता, नेतृत्व और सत्य के प्रतीक के रूप में देखा गया है।
ऋग्वेद के सूर्यसूक्त में सूर्य को सर्वद्रष्टा और प्रकाश का निर्माता कहा गया है।
ऋग्वेद 1.50.4 में सूर्य के विषय में “ज्योतिष्कृत्” अर्थात् प्रकाश उत्पन्न करने वाला और समस्त प्रकाशमान क्षेत्र को प्रकाशित करने वाला भाव मिलता है।
सूर्य को आत्मविश्वास, सम्मान, ऊर्जा, सरकारी क्षेत्र, उच्च पद, यश आदि का कारक माना गया है।
ज्योतिषशास्त्र में कुंडली में सूर्य की स्थिति को देखकर इन क्षेत्रों के बारे में पता लगाया जाता है।
ठीक इसी प्रकार हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य के स्थान के उभार और स्थिति को देखकर जातक के जीवन और भविष्य के बारे में जाना जाता है।
सूर्य पर्वत का अध्ययन करते समय उस पर मौजूद चिह्नों को देखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है क्योंकि, इनमें से कुछ खास निशानों को बहुत शुभ माना जाता है।
हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, सूर्य पर्वत पर स्टार, लाइन समेत कुछ निशानों को बेहद उत्तम माना जाता है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि ये चिह्न हमें भविष्य से जुड़े क्या संकेत देते हैं।
इसी लिए ज्योतिषीय परंपरा में जब किसी जातक की जन्मकुंडली में सूर्य पीड़ित दिखाई देता है और उसी व्यक्ति के सूर्य पर्वत पर विशेष चिह्न दिखाई देते हैं, तब दोनों को साथ रखकर विचार करना अत्यंत रोचक और सूक्ष्म फलित - विधि बन जाता है।
1. सूर्य पर्वत वास्तव में क्या है ?
हस्त - सामुद्रिक परंपरा में अनामिका के नीचे स्थित उन्नत भाग को सूर्य पर्वत कहा जाता है।
इस का संबंध सूर्यतत्त्व से जोड़ा जाता है।
यहाँ का अत्यधिक दबा हुआ, अत्यधिक उभरा हुआ, कठोर, असंतुलित अथवा संतुलित होना अलग - अलग फल की ओर संकेत करता है।
सूर्य पर्वत पर एक रेखा का निशान :
हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, अगर सूर्य पर्वत पर एस सीधी, गहरी और स्पष्ट दिखने वाली रेखा नजर आती हो, तो इसे बहुत शुभ संकेत माना जाता है।
मान्यता है कि ऐसे जातक को जीवन में खूब मान - सम्मान में मिलता है।
इन्हें समाज में विशेष सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
साथ ही, करियर के क्षेत्र में भी इनकी मेहनत रंग लाती है और धन के मामले में भी ये काफी भाग्यशाली हो सकते हैं।
क्योंकि इस रेखा को धन का प्रतीक भी माना जाता है।
ऐसे जातकों को रेखा दोष रहित, गहरी और सीधी दिखाई पड़ती है।
लेकिन महत्वपूर्ण नियम यह है कि सूर्य पर्वत का कोई एक चिह्न अकेले सम्पूर्ण भविष्य का निर्णय नहीं करता।
जन्मकुंडली सूर्य की राशि, भाव, नवांश, नक्षत्र, दृष्टि, युति, षड्बल, दशा और गोचर बताती है।
प्रश्नकुंडली वर्तमान प्रश्न की परिस्थिति बताती है।
नक्षत्र - पद्धति ग्रह की सूक्ष्म कार्यप्रणाली बताती है।
कृष्णमूर्ति पद्धति में नक्षत्र स्वामी और उपस्वामी के माध्यम से घटना की पुष्टि की जाती है।
अंकशास्त्र व्यक्ति की जन्मतिथि और नामांक आदि के माध्यम से एक अलग सांकेतिक परंपरा देता है।
हस्तरेखा और सामुद्रिक शास्त्र शरीर पर दिखाई देने वाले संकेतों का अध्ययन करते हैं।
इस लिए इन सबका संयुक्त सूत्र होना चाहिए—
कुंडली = मूल क्षमता
दशा = समय
गोचर = सक्रियता
नक्षत्र = सूक्ष्म ग्रहकार्य
प्रश्नकुंडली = वर्तमान प्रश्न
हस्तचिह्न = सहायक सामुद्रिक संकेत।
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{ Material type
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{ About this item
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2. सूर्य पर्वत पर पहला विशेष चिह्न — सूर्यरेखा
सूर्य पर्वत पर स्पष्ट, गहरी और अपेक्षाकृत सीधी सूर्यरेखा को परंपरागत हस्तरेखा-विचार में यश, प्रतिभा, सम्मान और अपने कार्य से पहचान मिलने का संकेत माना जाता है।
सूर्य पर्वत पर कई रेखाएं :
अनामिका यानी रिंग फिंगर के नीचे और हथेली के ऊपरी भाग में मौजूद सूर्य पर्वत पर यदि एक से अधिक रेखाएं, तो इसे भी करियर से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है।
हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, ऐसे जातकों को कलात्मक कार्यों में अधिक रुचि रहती है और ये इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना पसंद करते हैं।
वहीं, इन्हें करियर के क्षेत्र में अपनी मेहनत और प्रयासों से उच्च पद की प्राप्ति भी हो सकती है।
कहते हैं कि ऐसे जातक बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम होते हैं।
इसके विपरीत यदि सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव से पीड़ित होकर दशम भाव को भी कष्ट दे रहा हो, तो सूर्यरेखा होने पर भी जातक को सफलता प्राप्त करने में संघर्ष, विरोध, विलंब अथवा प्रतिष्ठा संबंधी उतार - चढ़ाव हो सकते हैं।
अर्थात् सूर्यरेखा का नियम है—
शुभ सूर्य + शुभ दशम भाव + अनुकूल दशा + स्पष्ट सूर्यरेखा = प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र में उन्नति की मजबूत संभावना।
3. सूर्य पर्वत पर नक्षत्र — अत्यंत महत्वपूर्ण सामुद्रिक संकेत
नक्षत्र अथवा स्टार - चिह्न सूर्य पर्वत के सबसे चर्चित विशेष चिह्नों में से एक है।
परंपरागत हस्तरेखा-फलित में इसे अचानक मिलने वाली प्रसिद्धि, सम्मान, उच्च उपलब्धि और प्रतिभा के प्रकाश से जोड़ा जाता है।
सूर्य पर्वत पर नक्षत्र का निशान
हथेली में सूर्य पर्वत के स्थान पर नक्षत्र का चिह्न होना उत्तम संकेत माना जाता है।
अगर किसी व्यक्ति की हथेली में ऐसा निशान हो, तो उसे अपने जीवन में खूब प्रसिद्धि मिल सकती है।
साथ ही, नक्षत्र के निशान को उच्च पद, प्रसिद्धि और धन प्राप्ति का प्रतीक भी माना जाता है।
ऐसे जातक करियर में जिस क्षेत्र में जाए वहां अच्छा पद प्राप्त हो सकता है।
जिसके जरिए आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग बनने की भी अधिक संभावनाएं हो सकती हैं।
लेकिन यहाँ सबसे बड़ा नियम है—
नक्षत्र स्पष्ट, स्वतंत्र और संतुलित होना चाहिए।
यदि कई अव्यवस्थित रेखाएँ आपस में काटकर केवल भ्रमपूर्ण आकृति बना रही हों, तो उसे वास्तविक शुभ नक्षत्र नहीं मानना चाहिए।
यदि कुंडली में सूर्य मजबूत है, दशम भाव मजबूत है और गुरु का सहयोग है, तब सूर्य पर्वत का स्पष्ट नक्षत्र प्रतिष्ठा के संकेत को और मजबूत कर सकता है।
यदि सूर्य पीड़ित हो लेकिन नक्षत्र स्पष्ट हो, तो प्रसिद्धि के साथ विवाद, विरोध, अहंकार - संघर्ष या प्रतिष्ठा में उतार - चढ़ाव भी हो सकता है।
4. सूर्य पर्वत पर दूसरी विशेष स्थिति — अनेक समानांतर रेखाएँ
सूर्य पर्वत पर एक से अधिक स्पष्ट रेखाएँ दिखाई दें तो सामुद्रिक परंपरा में इसे अनेक प्रतिभाओं, रचनात्मकता, सार्वजनिक संपर्क और अलग - अलग माध्यमों से पहचान प्राप्त करने की संभावना से जोड़ा जाता है।
यदि बुध भी शुभ हो तो लेखन, वाणी, व्यापार, सलाह, ज्योतिष, गणना और बौद्धिक कार्यों में लाभ की संभावना बढ़ती है।
यदि शुक्र शुभ हो तो कला, सौंदर्य, संगीत, अभिनय, डिजाइन और रचनात्मक कार्यों का संकेत मजबूत हो सकता है।
यदि गुरु का संबंध हो तो अध्यापन, धर्म, सलाह, मार्गदर्शन और सम्मानजनक पद की संभावना बढ़ सकती है।
इस लिए केवल “बहुत रेखाएँ हैं इस लिए बहुत प्रसिद्धि होगी” कहना उचित नहीं।
संबंधित ग्रह और भाव भी देखने चाहिए।
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| { Theme | God |
| Brand | TIED RIBBONS |
| Colour | Multicolour |
| Style | Modern |
| Material | Resin |
| Occasion | Diwali |
| Product Dimensions | 15L x 10W x 19H Centimeters |
| Cartoon Character | Home decor |
| Age Range (Description) | Baby |
| Number of Pieces } | 1 |
{ About this item
- Package Contents:1 Lord Hanuman Statue
- Material:- Poly Resin | Size - 15 X 19 Cm
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5. सूर्य पर्वत पर वर्ग — संरक्षण का संकेत
सूर्य पर्वत पर वृत्त
एक चिह्न = संकेत
सूर्य पर्वत पर वर्ग का निशान
अगर हथेली में सूर्य पर्वत के ऊपर वर्ग का निशान बना हो, तो यह भविष्य से जुड़े कई अच्छे संकेत दे सकता है।
वर्ग के निशान का अर्थ माना जाता है कि ऐसे जातक को समाज में विशेष मान - सम्मान प्राप्त होता है।
साथ ही, इनका जीवन भी अच्छा व्यतीत होता है। सम्मान प्राप्त करने के साथ - साथ इनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
इन्हें सरकारी और सामाजिक क्षेत्रों में लाभ मिलने की अधिक संभावना रहती है।
जिसके चलते जीवन सुखमय बना रहता है।
यदि जन्मकुंडली में गुरु की शुभ दृष्टि सूर्य पर हो, नवम भाव मजबूत हो और दशमेश शुभ हो, तो वर्ग का सकारात्मक फल अधिक मजबूत माना जा सकता है।
यदि शनि या राहु के कारण कार्यक्षेत्र में बाधाएँ हों, तब वर्ग यह संकेत दे सकता है कि बाधा के बावजूद अंततः स्थिति पूरी तरह नष्ट नहीं होगी।
६. सूर्य पर्वत पर वृत्त
सूर्य पर्वत पर वृत्त को भी विशेष चिह्न माना जाता है, लेकिन इसे अत्यंत सावधानी से पढ़ना चाहिए।
सामुद्रिक परंपरा में सूर्य से संबंधित वृत्त को असाधारण उपलब्धि, प्रतिभा और पहचान के संकेत के रूप में पढ़ा जाता है।
आधुनिक हस्तरेखा - व्याख्याओं में भी सूर्य पर्वत के विशेष चिह्नों को यश और उपलब्धि से जोड़ा गया है।
सूर्य पर्वत पर वृत्त का निशान :
हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, सूर्य पर्वत पर वृत्त का निशान होना बेहद खास प्रकार का संकेत देता है। वैसे तो इस चिह्न का बनना दुर्लभ माना जाता है।
लेकिन अगर किसी जातक की हथेली में सूर्य पर्वत पर यह निशान बन जाए, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है।
वृत्त का चिह्न यह बताता है कि आप अपने जीवन में कई बार विदेश की यात्रा कर सकते हैं।
साथ ही, करियर के क्षेत्र में भी आपको अपनी मेहनत से उन्नति और अच्छा पद प्राप्त हो सकता है।
परंतु यदि कुंडली में सूर्य दुर्बल है, दशम भाव पीड़ित है और वर्तमान दशा प्रतिकूल है, तो केवल वृत्त देखकर अत्यधिक बड़ा फल घोषित करना उचित नहीं।
यहाँ फिर वही सिद्धांत लागू होगा—
एक चिह्न = संकेत
कई स्वतंत्र पुष्टियाँ = फल की शक्ति।
७. सूर्य पर्वत पर त्रिभुज — बुद्धि और प्रतिभा का विशेष संकेत
सूर्य पर्वत पर त्रिभुज को सामुद्रिक परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है।
इसे प्रतिभा, व्यवस्थित बुद्धि, कला, सूझबूझ और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की क्षमता से जोड़ा जाता है।
यदि त्रिभुज स्पष्ट हो और सूर्यरेखा से संबंधित हो तो यह संकेत अधिक प्रभावी माना जाता है।
यदि जन्मकुंडली में सूर्य - बुध संबंध शुभ हो तो बुद्धि और अभिव्यक्ति से सफलता मिल सकती है।
सूर्य - शुक्र संबंध शुभ हो तो कला और रचनात्मक क्षेत्र में उन्नति हो सकती है।
सूर्य - गुरु संबंध शुभ हो तो ज्ञान, शिक्षण, आध्यात्मिकता, प्रशासन या सलाहकारी कार्य से सम्मान मिल सकता है।
इस प्रकार त्रिभुज का फल उसके साथ जुड़े ग्रहों के अनुसार बदल सकता है
7. सूर्य पर्वत पर त्रिकोण का निशान :
हथेली पर मौजूद सूर्य पर्वत पर कई चिह्नों को शुभ माना गया है।
इन्हीं में से एक है त्रिकोण का निशान, जिसे हस्तरेखा विज्ञान में बेहद शुभ माना गया है।
मान्यता है कि ऐसे जातकों की रुचि कला के क्षेत्र में अधिक रहती है।
साथ ही, इन्हें इस क्षेत्र में उच्च सम्मान की प्राप्ति हो सकती है।
सूर्य पर्वत पर त्रिकोण के निशान को मान - सम्मान और उच्च पद का प्रतीक माना गया है।
8. यदि ये छहों संकेत एक ही सूर्य पर्वत पर हों
यदि किसी जातक के सूर्य पर्वत पर—
1. स्पष्ट सूर्यरेखा,
2. अनेक शुभ रेखाएँ,
3. नक्षत्र,
4. वर्ग,
5. वृत्त, और
6. त्रिभुज
साफ दिखाई दें, तो सामुद्रिक परंपरा में इसे अत्यंत असाधारण सूर्य - तत्त्व का संकेत माना जा सकता है।
9. जातक की कौन - कौन सी तकलीफों में इन चिह्नों का महत्व ?
सूर्य से संबंधित समस्याओं में परंपरागत ज्योतिष निम्न विषयों पर विशेष विचार करता है—
10. प्रश्नकुंडली में नियम
11. गोचर का नियम :
13. उपाय :
14. सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय निष्कर्ष :
अंतिम फलित-सूत्र :
इस लिए सबसे सटीक नियम यही है—
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
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Shri Maha Prabhuji bethak Road,
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....




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