Tuesday, September 30, 2025

जानें हस्तरेखा से भविष्य....!/शकुन शास्त्र..!

जानें हस्तरेखा से भविष्य.....!

जानें हस्तरेखा से भविष्य....!/शकुन शास्त्र..!

क्षीण शनिरेखा एवं चन्द्र - क्षेत्र से उदित आकस्मिक रेखा

( भाग्योदय का शुभ संकेत )

यदि शनिरेखा प्रारम्भ में क्षीण व दूषित है...! 

एवं चन्द्र पर्वत से आकस्मिक रेखा प्रकट होती हो...! 

तो ऐसे में यदि यह आकस्मिक रेखा निर्दोष रूप से उदित हुई हो...! 

तो जातक किसी बाहरी व्यक्ति ( प्रेमी ) से प्रभावित होगा। 

तथा विपरीत लिंगी की सहायता उन्नति पथ की ओर आगे बढ़ने का शुभ संकेत...! 

यह भाग्यरेखा दे रही है।







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जानें हस्तरेखा से भविष्य.....!

चन्द्र क्षेत्र से उदित भाग्यरेखा

( विवाह द्वारा भाग्योदय )

यदि शनिरेखा चन्द्र पर्वत से उदय होती हुई शनि पर्वत की ओर आगे बढ़ती है...! 

तो जातक को विवाह के बाद आशातीत सफलता मिलती है। 

अथवा अपने परम प्रेमी किसी विपरीत लिंगी के माध्यम से जातक सफलता के शिखर को छूता है। 

विपरीत लिंगी का यह सहयोग आर्थिक भी हो सकता है...! 

या अच्छे सलाहकार के रूप से भी हो सकता है। 

मैंने बहुत से जीवन्त दृष्टान्तों में यह पाया है...! 

कि ऐसे सफल जातक को आगे उठाने में उनकी पत्नियों का सहभाग प्रमुख रूप से मुखरित रहा है।

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शकुन शास्त्र :

शकुन शास्त्र घर में किन जीवों का दिखना होता है शुभ संकेत , जानें क्या कहता है....! 

शकुन शास्त्र अपने पूर्वजों के समय से ही हम शगुन अपशगुन जैसे शब्द सुनते आए हैं। 

यह शब्द हमारे आसपास हो रही घटनाओं से संबंधित होते हैं। 

चलिए शकुन शास्त्र से यह जान लेते हैं किन जीवों का दिखना शुभ होता है।

हमारे जीवन में जितनी भी घटनाएं होती हैं...! 

उन सभी को हम शगुन और अपशगुन से जोड़कर देखते हैं। 

निकलते समय किसी को छींक होना...! 

बिल्ली का रास्ता काटना...! 

पूजा करते समय थाली से सामान गिरना या फिर कोई दूसरी चीज सभी बातों को मानने के पीछे हमारे पास कोई ना कोई वजह होती है। 

शकुन शास्त्र एक ऐसा ही माध्यम है...! 

जो हमें चीजों के पीछे छुपे हुए संकेत के बारे में बताता है।

शकुन शास्त्र एक ऐसी विद्या है...! 

जो जीव जंतु , पेड़ पौधों और हमारे डेली रूटीन में होने वाली घटनाओं से संबंधित संकेत की जानकारी प्रदान करती है। 

कई बार हमें अपने आसपास कुछ जीव जंतु दिखाई देते हैं। 

इन में से कुछ का दिखाना बहुत शुभ माना गया है और कुछ की वजह से अशुभ फल मिलने की बात भी कही जाती है। 

चलिए आज हम आपको उन जीवों के बारे में बताते हैं जो घर में अच्छी खबर लेकर आते हैं और इनका दिखना शुभ माना गया है।

क्या कहता है शकुन शास्त्र (Shakun Shastra)

छिपकली :

अगर आपको अपने घर में छिपकली दिखाई दे रही है तो यह काफी शुभ माना गया है। 

वहीं अगर एक साथ तीन छिपकली दिख जाती है तो समझ लीजिए....! 

कि घर में सुख समृद्धि का वास होने वाला है। 

घर में जितने भी सदस्य हैं उन्हें तरक्की की प्राप्ति होगी। 

दीवार पर चिपकी हुई छिपकली खुशखबरी मिलने का संकेत देती है। 

जमीन पर रेंग रही छिपकली धन लाभ होने की खबर लेकर आती है।

पक्षियों का दिखना :

अगर आपको अपने घर के आंगन में पक्षी फुदकते हुए दिखाई दे रहे हैं...! 

तो यह खुशहाली का संकेत लेकर आए हैं।

सुबह - सुबह अगर कोई चिड़िया बालकनी या छत पर नजर आती है...! 

तो यह पूरा दिन खुशियों से गुजरने का संकेत है। 

यह हमें बताती है कि कोई ना कोई शुभ अवसर और खबर आप तक आने वाली है।

काली चींटियां :

अपने घरों में अक्सर हम काली चीटियों का झुंड देखते हैं। 

यह मैं बताती है कि जो मुसीबत चल रही है वह दूर होने वाली है और जल्द ही खुशी आएंगी। 

काली चीटियों का दिखाना अच्छे दिन की शुरुआत माना जाता है। 

दरअसल यह माता लक्ष्मी का रूप होती है और आर्थिक तंगी दूर होने का संकेत लेकर आती हैं।

तितली आना :

कई बार हमें घर में अचानक से ही तितली उड़ती हुई दिखाई देती है। 

यह शुभ समाचारों के आने का संकेत है। 

अगर रंगीन तितली नजर आ रही है तो यह लव लाइफ में खुशियों की बौछार लेकर आती है। 

कली तितली हमें संदेश देती है कि करियर और बिजनेस में मुनाफे की प्राप्ति होने वाली है।

तोता :

अगर आपको अपने घर में अचानक तोता दिखाई देता है...! 

तो यह बहुत शुभ परिणाम लेकर आता है। 
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इस का संबंध भगवान कुबेर से माना जाता है। 

अगर आपके घर में यह नजर आ जाए तो समझ लीजिए की सुख समृद्धि आपके घर में आ चुकी है।

शकुन शास्त्र के 12 सूत्र :

घर में हर छोटी वस्तु का अपना महत्व होता है। 

कभी - कभी बेकार समझी जाने वाली वस्तु भी घर में अपनी उपयोगिता सिद्ध कर देती है। 

गृहस्थी में रोजाना काम में आने वाली चीजों से भी शकुन - अपशकुन जुड़े होते हैं....! 

जो जीवन में कई महत्वपूर्ण मोड़ लाते हैं। 







शकुन शुभ फल देते हैं....! 

वहीं अपशकुन इंसान को आने वाले संकटों से सावधान करते हैं। 

हम आपको घर से जुड़ी वस्तुओं के शकुनों के बारे में बता रहे हैं।

1 - दूध का शकुन :

सुबह - सुबह दूध को देखना शुभ कहा जाता है। 

दूध का उबलकर गिरना शुभ माना जाता है। 

इस से घर में सुख - शांति, संपत्ति, मान व वैभव की उन्नति होती है। 

दूध का बिखर जाना अपशकुन मानते हैं...! 

जो किसी दुर्घटना का संकेत है। 

दूध को जान - बूझकर छलकाना अपशकुन माना जाता है....! 

जो घर में कलह का कारण है।

2-दर्पण का शकुन :

हर घर में दर्पण का बहुत महत्व है। 

दर्पण से जुड़े कई शकुन - अपशकुन मनुष्य जीवन को कहीं न कहीं प्रभावित अवश्य करते हैं। 

दर्पण का हाथ से छूटकर टूट जाना अशुभ माना जाता है। 

एक वर्ष तक के बच्चे को दर्पण दिखाना अशुभ होता है। 

यदि कोई नव विवाहिता अपनी शादी का जोड़ा पहन कर श्रृंगार सहित खुद को टूटे दर्पण में देखती है तो भी अपशकुन होता है। 

तात्पर्य यह है कि दर्पण का टूटना हर दृष्टिकोण से अशुभ ही होता है। 

इस के लिए यदि दर्पण टूट जाए तो इसके टूटे हुए टुकड़ों को इकटठा करके बहते जल में डाल देने से संकट टल जाते हैं।

3-पैसे का शकुन :

आज के इस युग में पैसे को भगवान माना जाता है। 

जेब को खाली रखना अपशकुन मानते हैं। 

कहा जाता है कि पैसे को अपने कपड़ों की हर जेब में रखना चाहिए। 

कभी भी पर्स खाली नहीं रखना चाहिए।

4-चाकू का शकुन :

चाकू एक ऐसी वस्तु है, जिसके बिना किसी भी घर में काम नहीं चल सकता। 

इस की जरूरत हर छोटे - छोटे कार्य में पड़ती है। 

इस से जुड़े भी अनेक शकुन - अपशकुन होते हैं। 

डाइनिंग टेबल पर छुरी - कांटे का क्रास करके रखना अशुभ मानते हैं....! 

इस के कारण घर के सदस्यों में झगड़ा हो जाता है। 

मेज से चाकू का नीचे गिरना भी अशुभ होता है। 

नवजात शिशु के तकिए के नीचे चाकू रखना शुभ होता है तथा छोटे बच्चे के गले में छोटा सा चाकू डालना भी अच्छा होता है। 

इस से बच्चों की बुरी आत्माओं से रक्षा होती है व नींद में बच्चे रोते भी नहीं हैं। 

यदि कोई व्यक्ति आपको चाकू भेंट करे तो इसके बुरे प्रभाव से बचने के लिए एक सिक्का अवश्य दें।

5-झाडू का शकुन :

घर के एक कोने में पड़े हुए झाडू को घर की लक्ष्मी मानते हैं....! 

क्योंकि यह दरिद्रता को घर से बाहर निकालता है। 

इस से भी कई शकुन व अपशकुन जुड़े हैं। 

दीपावली के त्यौहार पर नया झाडू घर में लाना लक्ष्मी जी के आगमन का शुभ शकुन है। 

नए घर में गृह प्रवेश से पूर्व नए झाडू का घर में लाना शुभ होता है। 

झाडू के ऊपर पांव रखना गलत समझा जाता है। 

यह माना जाता है कि व्यक्ति घर आई लक्ष्मी को ठुकरा रहा है। 

कोई छोटा बच्चा अचानक घर में झाडू लगाने लगे तो समझ लीजिए...! 

कि घर में कोई अवांछित मेहमान के आने का संकेत है। 

सूर्यास्त के बाद घर में झाडू लगाना अपशकुन होता है...! 

क्योंकि यह व्यक्ति के दुर्भाग्य को निमंत्रण देता है।

6-बाल्टी का शकुन :

सुबह के समय यदि पानी या दूध से भरी बाल्टी दिखाई दे तो शुभ होता है। 

इस से मन में सोचे कार्य पूरे होते हैं। 

खाली बाल्टी देखना अपशकुन समझा जाता है, जो बने - बनाए कार्यों को बिगाड़ देता है। 

रात को खाली बाल्टी को प्रायः उल्टा करके रखना चाहिए एवं घर में एक बाल्टी को अवश्य भरकर रखें...! 

ताकि सुबह उठकर घर के सदस्य उसे देख सकें।

7-लोहे का शकुन :

घर में लोहे का होना शुभ कहा जाता है। 

लोहे में एक शक्ति होती है, जो बुरी आत्माओं को घर से भगा देती है। 

पुरा ने व जंग लगे लोहे को घर में रखना अशुभ है। 

घर में लोहे का सामान साफ करके रखें।

8-हेयरपिन का शकुन :

हेयरपिन एक बहुत ही मामूली सी चीज है....! 

परंतु इसका प्रभाव बड़ा आश्चर्यजनक होता है। 

यदि किसी व्यक्ति को राह में कोई हेयरपिन पड़ा मिल जाये तो समझो कि उसे कोई नया मित्र मिलने वाला है। 

वहीं यदि हेयर पिन खो जाये तो व्यक्ति के नए दुश्मन पैदा होने वाले हैं। 

हेयरपिन को घर में कहीं लटका दिया जाए तो यह अच्छे भाग्य का प्रतीक है।

9-काले वस्त्र का शकुन :

काले वस्त्र बहुत अशुभ माने जाते हैं। 

किसी व्यक्ति के घर से बाहर जाते समय यदि कोई आदमी काले वस्त्र पहने हुए दिखाई दे तो अपशकुन माना जाता है....! 

जिसके बुरे प्रभाव से जाने वाले व्यक्ति की दुर्घटना हो सकती है। 

अतः ऐसे व्यक्ति को अपना जाना कुछ मिनट के लिए स्थगित कर देना चाहिए।
+++ +++
10-रुई का शकुन :

रूई का कोई टुकड़ा किसी व्यक्ति के कपड़ों पर चिपका मिले तो यह शुभ शकुन है। 

यह किसी शुभ समाचार आने का संकेत है या किसी प्रिय व्यक्ति के आने का संकेत है। 

कहा जाता है कि रूई का यह टुकड़ा व्यक्ति को किसी एक अक्षर के रूप में नजर आता है...! 

व यह अक्षर उस व्यक्ति के नाम का प्रथम अक्षर होता है....! 

जहां से उस व्यक्ति के लिए शुभ संदेश या पत्र आ रहा है।

11-चाबियों का शकुन :

चाबियों का गुच्छा गृहिणी की संपूर्णता का प्रतीक है। 

यदि गृहिणी के पास चाबियों का कोई ऐसा गुच्छा है....! 

जिस पर बार - बार साफ करने के बाद भी जंग चढ़ जाए तो यह एक अच्छा शकुन है। 

इस के फलस्वरूप घर का कोई रिश्तेदार अपनी जायदाद में से आपको कुछ देना चाहता है...! 

या आपके नाम से कुछ धन छोड़कर जाना चाहता है। 

चाबियों को बच्चे के तकिए के नीचे रखना भी अच्छा होता है....! 

इस से बुरे स्वप्नों एवंबुंरी आत्माओं से बच्चे का बचाव होता है।

12-बटन का शकुन :

कभी - कभी कमीज़, कोट या अन्य कोई कपड़े का बटन गलत लग जाए तो अपशकुन होता है, जिसके अनुसार सीधे काम भी उल्टे पड़ जाएंगे। 

इस के दुष्प्रभाव से बचने के लिए कपड़े को उतारकर सही बटन लगाने के बाद पहनें। 

यदि रास्ते चलते आपको कोई बटन पड़ा मिल जाए तो यह आपको किसी नए मित्र से मिलवाएगा।

!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!

जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

आपका अपना पंडित प्रभुलाल पी. वोरिया, क्षत्रिय राजपूत जडेजा कुल गुरु का " जय द्वारकाधीश"

पंडित प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जडेजा कुल गुरु :-

प्रोफेस्सिनोल ज्योतिष एक्सपर्ट :-

-: 1987 वर्ष से ऊपर ज्योतिष का अनुभव  :-

श्री सरस्वती ज्योतिष कार्यालय

(2 गोल्ड मेडलिस्ट ज्योतिष और वास्तु साईंन्स )

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Saturday, September 27, 2025

जानें हस्तरेखा से भविष्य..! :

हथेली में ये गुण होने पर भाग्य रेखा देती है धन, सम्मान और करियर में बड़ा पद :


हथेली में ये गुण होने पर भाग्य रेखा देती है धन, सम्मान और करियर में बड़ा पद :


हिंदू धर्म में ज्योतिषशास्त्र की तरह ही हस्तरेखा विज्ञान का भी बहुत खास महत्व होता है। 

इसमें किसी भी व्यक्ति के हाथों की बनावट, पर्वत और रेखाओं को देखकर उसके भविष्य, जीवन व स्वभाव के बारे में पता लगाया जा सकता है। 

हथेली में जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा, स्वास्थ्य रेखा, भाग्य रेखा आदि मौजूद होती हैं। 

जिनकी बनावट, लंबाई और जुड़ाव को देखकर भविष्य के बारे में पता किया जाता है। 

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, भाग्य रेखा हमारी कलाई के पास हथेली के नीचे से शुरू होती है। 

यह बिल्कुल मध्य से होते हुए मध्यमा उंगली की ओर सीधी जाती है। 

इस रेखा का संबंध करियर, धन, बाधाओं, अवसरों और सफलता से होता है। 

माना जाता है कि एक अच्छी भाग्य रेखा तब ही धन, मान - सम्मान, उच्च पद और प्रतिष्ठा प्रदान करती है जब हाथ में कुछ और विशेष प्रकार के गुण भी मौजूद होते हैं। 

आइए विस्तार से जानें इसके बारे में...!





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हस्तरेखा शास्त्र में हथेली में मौजूद रेखाओं, पर्वतों आदि को देखकर किसी जातक के भविष्य और जीवन के बारे में पता लगाया जाता है। 

इन रेखाओं की लंबाई, बनावट और गहराई बताती है कि हमारे जीवन में सुख ज्यादा है या संघर्ष। 

इनमें से भाग्य रेखा करियर, धन, अवसर, बाधाओं और सफलता को दर्शाती है। 
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आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि हथेली में भाग्य रेखा के साथ कौन - कौन से गुण होने पर व्यक्ति को धन, सम्मान और करियर में सफलता हासिल होती है।

ऐसी हथेली होने पर मिलता भाग्य रेखा का पूर्ण लाभ :

माना जाता है कि भाग्य रेखा तभी व्यक्ति को पूरा लाभ देती है जब हथेली बिल्कुल समरूप से संतुलित हो और साथ ही, हाथ के बीच वाली गड्ढा ज्यादा गहरा न हो। 

इस प्रकार की हथेली होने पर भाग्य रेखा जातक को करियर में सफलता हासिल कर सकती है। 

इसके लिए हथेली के साथ - साथ उंगलियों का भी सही प्रकार से विकसित, लंबा और सीधा होना जरूरी माना जाता है। 

उंगलियां समतल होकर हथेली से जुड़ी होनी चाहिए और ग्रह क्षेत्रों का भी सही प्रकार से उन्नत होना व कोई दोष न होना जरूरी होता है। 

हथेली में भाग्य रेखा के साथ अगर ये गुण भी मौजूद हों, तो यह सफलता और करियर में उन्नति को दर्शाता है।

ऐसी भाग्य रेखा होने पर करियर में आती है बाधाएं :

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर भाग्य रेखा बिना किसी शाखा के हथेली पर मौजूद हो तो यह कोई फल नहीं आती है। 

ऐसी भाग्य रेखा होने पर व्यक्ति को करियर में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। 

माना जाता है कि भाग्य रेखा हथेली पर ऐसी होनी चाहिए जिसमें शाखाएं और वो बुध, बृहस्पति या सूर्य पर्वत के क्षेत्रों की ओर जाती हो। 

हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक, बिना शाखाओं वाली रेखा व्यक्ति को हानि पहुंचा सकती है। 

अगर भाग्य रेखा की शाखाएं ऊपर की ओर जाती हो, तो उन्हें अच्छा माना जाता है। 

इसके अलावा, छोटी भाग्य रेखा करियर में मुश्किलों को दर्शाती है।

ऐसी भाग्य रेखा होने पर सौभाग्य में होती है वृद्धि :

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, अगर भाग्य रेखा हृदय रेखा से मिली हुई हो, तो उस जातक का प्रेम विवाह होता है। 

इसी के कारण व्यक्ति के सौभाग्य में भी वृद्धि होती है और जीवन में सुख - समृद्धि बनी रहती है। 

कुछ मान्यताएं ऐसी भी हैं कि अगर भाग्य रेखा हृदय रेखा रेखा के पास ही रुक जाए, तो ऐसे में जातक के करियर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और उसे कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। 

लेकिन इसके दूसरे मत को हस्तरेखा विज्ञान में अधिक मान्यता दी गई है। 

माना जाता है कि भाग्य रेखा का गंतव्य स्थान शनि पर्वत है और उससे पहले रेखा का रुक जाना भाग्य रेखा के गुणों को रुकने के स्थान पर समाप्त कर देता है।

हथेली में इन गुणों का होना भी है बेहद जरूरी :

​हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, शीर्ष यानी मस्तिष्क रेखा बिल्कुल सही प्रकार से अंकित होने के साथ - साथ लंबी, सीधी और गहरी भी होनी चाहिए। 

साथ ही, यह रेखा बृहस्पति पर्वत से उदय होती हो और जीवन रेखा को जाकर स्पर्श करे।

हथेली में सूर्य रेखा का होना भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। 

माना जाता है कि इसकी सहायता के बिना किसी भी व्यक्ति को सफलता मिलना बहुत ज्यादा मुश्किल और बाधाओं भरा होता है।

हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक, हाथ के अंगूठे में इच्छा शक्ति और तर्क शक्ति का सही प्रकार से संतुलित होना बेहद जरूरी होता है। 

बता दें कि अंगूठे का पहला पोर अच्छा शक्ति और दूसरा पोर तर्क शक्ति को दर्शाता है।
हथेली में भाग्य रेखा छोटी नहीं होनी चाहिए और लहरदार भी नहीं होनी चाहिए। 

माना जाता है कि ऐसी रेखा जीवन में मुसीबतों, बाधाओं और आर्थिक समस्याओं को दर्शाती है।

अगर भाग्य रेखा जीवन रेखा के अंदर से शुरू होती हो, तो जातक का जीवन प्रेम पर आधारित होता है। 

यानी अगर पुरुष हो तो स्त्री के और अगर स्त्री हो तो पुरुष के प्रेम पर उसका जीवन आधारित माना जाता है।
!!!!! शुभमस्तु !!!

🙏हर हर महादेव हर...!!
जय माँ अंबे ...!!!🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
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Wednesday, September 24, 2025

जानें हस्तरेखा से भविष्य..! :

कैसे पढ़ें हथेली में छुपी किस्मत की कहानी :


कैसे पढ़ें हथेली में छुपी किस्मत की कहानी :


हस्तरेखा अध्ययन में सही रोशनी, एकांत, हाथ की बनावट, उंगलियां, नाखून, पर्वत और रेखाओं का क्रमिक निरीक्षण आवश्यक है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य और भविष्य का सटीक आकलन हो सके। 

हस्तरेखा विज्ञान में सूर्योदय का समय महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय रक्त संचार बेहतर होता है। 

हस्तरेखा विशेषज्ञ को व्यक्ति के सामने बैठकर, उचित प्रकाश में हाथ की बनावट, उंगलियों और अंगूठे का विश्लेषण करना चाहिए।







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हस्तरेखाओं को देखने का अद्भुत क्रम :

हस्तरेखा देखने के लिए सूर्योदय का समय अति महत्त्वपूर्ण माना जाता है, प्रातः काल के समय हाथों में रक्त का संचालन प्रबल होता है, इसलिये हस्तरेखाएं और उनका रंग अधिक स्पष्ट दिखाई पड़ता है। 

वैसे तो सफलतापूर्वक हस्तपरीक्षण के लिये कोई विशेष समय नियत नहीं है लेकिन यह हस्तरेखा विशेषज्ञ के उपर निर्भर करता है, जब उसे इष्ट प्रेरणा देते हैं, तब हथेली का हर हिस्सा बोलने लगता है।

हस्तरेखाविद् को हाथ देखने के लिए व्यक्ति के ठीक सामने बैठना चाहिये ताकि रोशनी सीधे उसके हाथों पर पड़े।

हस्तरेखा आदि देखते समय वहां किसी तीसरे व्यक्ति को खड़े होने देना या बैठने देना भी उचित नहीं, क्योंकि ऐसा व्यक्ति अनजाने में दोनों के ध्यान को बंटा सकता है।

हस्तपरीक्षण आरम्भ करते समय व्यक्ति को अपने सामने बैठा कर सबसे पहले यह देखना चाहिए कि हाथ की बनावट किस प्रकार की है।

इसके बाद उंगलियों को देखना चाहिए कि वे हाथ की बनावट से मिलती - जुलती हैं या किसी अन्य प्रकार की हैं।

पहले बायां हाथ देखना चाहिये और तब दायें हाथ को देखना चाहिये कि उसमें बायें हाथ की अपेक्षा क्या - क्या परिवर्तन एवं परिवर्धन आए हैं और तब दायें हाथ को अपने निरीक्षण का आधार बना लेना चाहिये।

प्रसिद्ध हस्तरेखाविद् कीरो के अनुसार महत्त्वपूर्ण विषयों, जैसे बीमारी, मृत्यु, धनहानि, विवाह अथवा किसी घटना के घटने का निष्कर्ष निकालने से पर्व बायें हाथ का परीक्षण करना अत्यावश्यक है।

जिस हाथ का परीक्षण कर रहे हों उसे दृढ़ता से अपने हाथों में पकड़े रहें।

रेखा या चिह्न को भी दबाते रहना चाहिए ताकि उनमें रक्त का प्रवाह भली - भांति होने लगे और परिवर्तन या परिवर्धन होने की सम्भावना स्पष्ट दीख जाए।

इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि हाथ के प्रत्येक भाग, जैसे उसके पीछे का भाग, सामने का भाग, नाखून, त्वचा, रंग, उंगलियां, अंगूठा व मणिबन्ध आदि की परीक्षा भी की जानी चाहिये।

सबसे पहले अंगूठा देखना चाहिये कि वह लम्बा है या छोटा तथा ठीक से विकसित हुआ है या नहीं। 

उसका इच्छाशक्ति वाला पर्व दृढ़ है या लचीला, कमजोर है या सशक्त। 

उसके बाद हथेली को देखना चाहिए कि वह कठोर या कोमल कैसी है।

इसके बाद उंगलियों पर ध्यान देना चाहिए, ध्यानपूर्वक देखना चाहिए कि हथेली से उनका अनुपात क्या है। 

वे लम्बी हैं या छोटी। 

उसके बाद उनकी श्रेणी निर्धारित करें, वे चमचाकार हैं या वर्गाकार, यदि वे मिश्रित हैं तो हर उंगली को 

सावधानीपूर्वक देखते हुए प्रत्येक की श्रेणी निर्धारित करें। 

तत्पश्चात् नाखूनों को देखें और उनसे व्यक्ति के स्वभाव और स्वास्थ्य का ज्ञान करें। 

अन्त में सारे हाथ को सावधानी से देखते हुए पर्वतों पर ध्यान केन्द्रित करें और देखें कि कौन - कौन सा पर्वत प्रमुखता लिये हुए है।

इसके बाद रेखाओं पर आएं, यह देखने के लिए कि कौन - सी रेखा पहले देखी जाए कोई निश्चित नियम नहीं है, परन्तु फिर भी जीवन रेखा और स्वास्थ्य रेखा को एक साथ लेकर परीक्षण आरम्भ किया जाना चाहिए। 
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उसके बाद मस्तिष्क रेखा, फिर भाग्य रेखा और उसके बाद हृदय रेखा आदि पर ध्यान देना चाहिए।

विवाह रेखा आपकी शादी के बारे में खोलती है ये बड़े राज, जानें अपनी रेखा का रहस्य :

ज्योतिषशास्त्र के प्रकार ही हस्तरेखा शास्त्र का भी बेहद खास महत्व होता है। 

इसमें मनुष्य की हाथ की रेखाओं और पर्वतों को देखकर उसके स्वभाव, जीवन व भविष्य के बारे में जाना जाता है। 

हस्तरेखा शास्त्र में हृदय रेखा, भाग्य रेखा, जीवन रेखा आदि का वर्णन मिलता है। 

इन्हीं में से एक है विवाह रेखा जिसे देखकर आप अपनी शादी के बारे में कई बड़ी बातें जान सकते हैं। 

यह रेखा हथेली में छोटी उंगली के नीचे और हृदय रेखा के ऊपर मौजूद होती है। 

इस से शादी के बारे में मनुष्य को कई छोटे-बड़े संकेत मिल सकते हैं। 

आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि लंबी, टूटी हुई, दोहरी आदि विवाह रेखाओं का क्या अर्थ होता है और यह हमें क्या संकेत देते हैं।

हस्तरेखा शास्त्र में विवाह रेखा का विशेष महत्व है, जो हथेली पर छोटी उंगली के नीचे स्थित होती है। 

यह रेखा व्यक्ति के विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़े कई संकेत देती है। 

लंबी, टूटी हुई या दोहरी विवाह रेखाएं शादी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं, जिससे भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है।

मस्तिष्करेखा व हृदयरेखा के मध्य दूषित भाग्यरेखा :

( निर्णय सावधानी से )

मनुष्य के जीवन में एक दूसरा एवं सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण बदलाव आता है...! 

आयु के 30 व 45 वर्ष के मध्य और यह समय प्रायः मस्तिष्क व हृदय रेखा के मध्य की दूरी का होता है। 
व्यापारी वर्ग के जीवन में यह एक संक्रान्ति काल होता है, जिस समय उन्हें रुपयों की सर्वाधिक आवश्यकता रहती है। 

क्योंकि इसी उम्र में व्यक्ति बड़े कारोबार या उद्योग के मार्फत अपनी पूंजी दांव पर लगाता है तथा यह काल व्यक्ति के जीवन में प्रायः उसके स्वतन्त्र अस्तित्व एवं निर्णय शक्ति से प्रभावित होता है। 

क्योंकि इसके ( 30 साल के ) पूर्व का जीवन व्यक्ति माता - पिता, अपने बड़े बुजुर्गों की राय, धन या प्रभाव में व्यतीत करता है। 

जैसे जैसे समय बीतता जाता है, जातक बड़ा होता है, वैसे - वैसे अपनी बुद्धि व रुचि के अनुसार कार्य करने की प्रवृत्ति से प्रभावित होता है। 

यदि इस समय सही मार्ग मिल जाता है तो जातक उन्नति के पथ की ओर स्थायी रूप से आगे बढ़ जाता है। 

यदि इस समय निर्णय गलत हो जाते हैं तो जातक को पछताना पड़ता है एवं अपनी अनुभवहीनता का हर्जाना भुगतना पड़ता है। 

मस्तिष्करेखा एवं हृदयरेखा के मध्य वाले अन्तराल ( 30 से 45 वर्ष ) में ज्यादातर शनिरेखा दूषित पाई जाती है। 

जबकि बचपन से मस्तिष्करेखा के नीचे तक अर्थात 25 से 30 वर्ष की आयु तक अधिकतम भाग्य रेखाएं गहरी ही पाई जाती हैं।

आपका अपना पंडित प्रभुलाल पी. वोरिया, क्षत्रिय राजपूत जडेजा कुल गुरु का " जय द्वारकाधीश"
पंडित प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जडेजा कुल गुरु :-
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-: 1987 वर्ष से ऊपर ज्योतिष का अनुभव  :-
श्री सरस्वती ज्योतिष कार्यालय
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Monday, September 22, 2025

जानें हस्तरेखा से भविष्य..!

विवाह रेखा आपकी शादी के बारे में खोलती है ये बड़े राज, जानें अपनी रेखा का रहस्य :

विवाह रेखा आपकी शादी के बारे में खोलती है ये बड़े राज, जानें अपनी रेखा का रहस्य :


हस्तरेखा शास्त्र में विवाह रेखा का विशेष महत्व है, जो हथेली पर छोटी उंगली के नीचे स्थित होती है। 

यह रेखा व्यक्ति के विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़े कई संकेत देती है। 

लंबी, टूटी हुई या दोहरी विवाह रेखाएं शादी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं, जिससे भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है।

ज्योतिषशास्त्र के प्रकार ही हस्तरेखा शास्त्र का भी बेहद खास महत्व होता है। 

इसमें मनुष्य की हाथ की रेखाओं और पर्वतों को देखकर उसके स्वभाव, जीवन व भविष्य के बारे में जाना जाता है। 





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हस्तरेखा शास्त्र में हृदय रेखा, भाग्य रेखा, जीवन रेखा आदि का वर्णन मिलता है। 

इन्हीं में से एक है विवाह रेखा जिसे देखकर आप अपनी शादी के बारे में कई बड़ी बातें जान सकते हैं। 

यह रेखा हथेली में छोटी उंगली के नीचे और हृदय रेखा के ऊपर मौजूद होती है। 

इससे शादी के बारे में मनुष्य को कई छोटे-बड़े संकेत मिल सकते हैं। 

आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि लंबी, टूटी हुई, दोहरी आदि विवाह रेखाओं का क्या अर्थ होता है और यह हमें क्या संकेत देते हैं।

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लंबी और सीधी विवाह रेखा का रहस्य :


हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर एक लंबी और सीधी विवाह रेखा के मौजूद होने का अर्थ होता है कि विवाह के बाद आपके रिश्ते में तालमेल बना रह सकता है। 

विवाह रेखा का गहरा होना इस बात का संकेत होता है कि आपका वैवाहिक जीवन खुशहाली और प्रेम से भरपूर रहेगा। 

साथ ही, आपको भरोसेमंद और सहयोगी जीवनसाथी मिलेगा। 

शादी के बाद आप दोनों ही रिश्ते को हमेशा अटूट और मजबूत बनाए रखने के लिए प्रयास करते हैं। 

साथ ही, हर चुनौती का एक साथ सामना कर सकते हैं।

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ऐसी विवाह रेखा वाले शादी को लेकर रहते हैं सतर्क :


माना जाता है कि जिन लोगों के हाथ पर विवाह रेखा ज्यादा लंबी नहीं होती है वे अपनी शादी और रिश्तों को लेकर सोच-समझकर फैसला लेना पसंद करते हैं। 

ऐसे लोग काफी संयमित और सतर्क रहते हैं। 

इन्हें अपने रिश्तों और विवाह में फैसले जल्दबाजी में लेना पसंद नहीं होता है। 

छोटी विवाह रेखा यह भी संकेत देती है कि आपके लाइफ में रोमांस और सहानुभूति की भावना थोड़ी कम हो सकती है।


ऐसी लाइन होने पर शादी होती है सफल :


हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार, अगर हथेली पर केवल एक विवाह रेखा गहरी बनी हुई हो, तो यह संकेत देती है कि आपको एक वफादार जीवनसाथी मिलेगा और आप उनके साथ हमेशा खुश रहेंगे। 

इस रेखा का अर्थ माना जाता है कि आपका विवाह सफल रहेगा और लंबे समय तक चलेगा। 

ऐसे लोगों को जीवनसाथी बहुत साथ देना वाला मिलता है और शादी के बाद इनका रिश्ता हमेशा मजबूत भी बना रह सकता है।


बाधाओं और कठिनाइयों को दर्शाती है ऐसी विवाह रेखा :


अगर किसी व्यक्ति के हाथ पर विवाह रेखा टूटी हुई हो तो यह संकेत देती है कि आपको वैवाहिक जीवन में कुछ कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। 

जीवनसाथी के साथ अक्सर मतभेद हो सकते हैं। 

ऐसे में रिश्ता मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों को ही प्रयास करने पड़ सकते हैं। 

टूटी हुई रेखा यह भी संकेत देती है कि चुनौतियों के साथ - साथ खुशनुमा पल भी आपके जीवन में आते रह सकते हैं।

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ऐसी रेखा होने पर वैवाहिक जीवन रहता है सुखी :


हथेली पर विवाह रेखा अगर ऊपर की तरफ मुड़ी हुई हो तो यह संकेत देती है कि आपका वैवाहिक जीवन अच्छा रहने वाला है। 

साथ ही, जीवनसाथी के साथ रिश्ता मजबूत बनता है और दोनों के जीवन में सदैव सकरात्मकता बनी रहती है। 

आप दोनों ही एक दूसरे का सहयोग और समर्थन करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 

ऐसी विवाह रेखा एक सफल शादी का संकेत देती है।


हथेली में दो विवाह रेखा होने का मतलब :


हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर हथेली में दो विवाह रेखा एक बराबर लंबाई वाली मौजूद हों तो यह संकेत देती है कि आपका किसी के साथ बेहद गहरा रिश्ता बन सकता है। 

लेकिन किसी कारणवश विवाह नहीं हो पाता। 

ऐसे में कुछ समय बाद किसी और से शादी करनी पड़ सकती है। 

यह रेखा शादी से जुड़े केवल कुछ संकेत देती है। 

सटीकता के लिए हस्तरेखा शास्त्र में कई और चीजों को भी देखा जाता है।


हाथ की इन तीन रेखाओं के बारे में जानने वाला, समझने लगता है भविष्य के संकेत :


हस्तरेखा विज्ञान में तीन प्रमुख रेखाओं को समझने से जीवन के रहस्य उजागर होने लगते हैं। 

मस्तिष्क रेखा व्यक्ति की बुद्धि, सोच और निर्णय क्षमता के बारे में बताती है। 

हृदय रेखा प्रेम, करुणा और भावनात्मक गहराई को दर्शाती है। 

वहीं जीवन रेखा स्वास्थ्य, ऊर्जा और आयु का संकेत देती है।

मस्तिष्क रेखा का अर्थ है व्यक्ति की मानसिकता...!

हृदय रेखा का अर्थ है स्नेह...!

जीवन रेखा अर्थात् व्यक्ति की जीवन अवधि...!

जब तक कोई अनुभव हमारी इंद्रियों या अंतर्मन से न जुड़ जाए, तब तक उस पर विश्वास करना कठिन होता है, यही कारण है कि दुनिया में आस्तिक और नास्तिक जैसी दो विचारधाराएं हैं। 

ये दोनों विचारधाराएं एक - दूसरे से भिन्न होते हुए भी गहराई में जाकर देखे जाएं तो एक - दूसरे पर अन्योन्याश्रित हैं। 

मानव की जिज्ञासा और उसकी आस्था तथा निराशा के बीच ज्योतिष शास्त्र, हस्तरेखा विज्ञान एक अनोखा सेतु है।

हथेली की रेखाएँ व्यक्ति की प्रवृत्तियों, क्षमताओं और स्वभाव की गुप्त चाबी हैं। 

जैसे जन्मकुण्डली में ग्रह संकेत रूप में व्यक्ति के बारे में सब कुछ बता देते हैं, उसी प्रकार से हाथों की लकीरें बहुत सारे रहस्यों का पर्दाफाश करती हैं। 

इस लिए प्राचीन ऋषियों से लेकर आधुनिक विद्वानों तक, हर युग में ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत हस्तरेखा तथा जन्मकुण्डली विज्ञान, मानव स्वभाव और नियति को समझने का एक सशक्त माध्यम है।

अध्यात्मिकवेत्ताओं के अनुसार ब्रह्मांड के सारे नियम मनुष्य के जीवन पर भी लागू होते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र कार्य - कारण सिद्धांत के अनुसार चलता है। 

जैसे किसी बीज में भविष्य का पेड़ छिपा होता है, वैसे ही किसी व्यक्ति की हथेली और उसकी जन्मकुण्डली में उसका भविष्य और व्यक्तित्व की दिशा अंकित होती है।

ज्योतिष शास्त्र, हस्तरेखा, जन्मकुण्डली इत्यादि के द्वारा दिए गए मार्गदर्शन को केवल भविष्यवाणी तक ही सीमित नहीं करना चाहिए...! 

बल्कि ये प्रकृति द्वारा जीवन में दी गई अनन्त संभावनाओं को पहचानने का माध्यम है। 

अनन्त सम्भावनाओं में से व्यक्ति अपने लिए, अपनी सफलता के लिए सम्भावनाओं का चयन कर उस पर दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ अपना भविष्य बना सकता है।

मस्तिष्क रेखा है व्यक्ति की मानसिकता का दर्पण - मस्तिष्क रेखा हथेली में व्यक्ति की बुद्धि, विचार शक्ति और मानसिक प्रवृत्ति को दर्शाती है।

हृदय रेखा है स्नेह और भावनाओं की पहचान - हृदय रेखा प्रेम, करुणा और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।

जीवन रेखा है जीवन शक्ति और आयु का संकेत - जीवन रेखा व्यक्ति की आयु, जीवनशक्ति और स्वास्थ्य को दर्शाती है।

हथेली की तीन रेखाओं को विस्तार से जानने वाला भविष्य की दिशा समझने लगता है।

{ पंडारामा प्रभु राज्यगुरू ( द्रविड़ ब्राह्मण ) }

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर: -
श्री सरस्वति ज्योतिष कार्यालय
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Satvara vidhyarthi bhuvn,
" Shri Aalbai Niwas "
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

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